गन्ने में अधिक फुटाव के लिए करें, इस दवा का उपयोग खेत में दिखेंगे कल्लें-कल्लें

गन्ने में अधिक फुटाव के लिए करें, इस दवा का उपयोग खेत में दिखेंगे कल्लें-कल्लें

गन्ने में अधिक फुटाव के लिए कौन सी दवा डालें

गन्ने में अच्छे फुटाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 1 मिली/लीटर, कार्बोंडाज़िम 1 ग्राम/लीटर और एथ्रल (बायर कंपनी की) 20 मिली/एकड़ की दर से छिड़काव करना चाहिए।

गन्ने में अधिक फुटाव के लिए करें, इस दवा का उपयोग खेत में दिखेंगे कल्लें-कल्लें
गन्ने में अधिक फुटाव के लिए करें, इस दवा का उपयोग खेत में दिखेंगे कल्लें-कल्लें

मान लीजिए कि आपको एक एकड़ में छिड़काव के लिए 100 लीटर पानी की आवश्यकता है, तो आपको 100 लीटर पानी में 100 मिलीलीटर इमिडाक्लोप्रिड 17.8, 100 मिलीलीटर कार्बनडाज़िम और केवल 20 मिलीलीटर एथ्रल मिलाकर घोल बनाना होगा और इसका छिड़काव करना होगा। ध्यान रखें एथ्रल की मात्रा 20 मिलीलीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए, अन्यथा फसल खराब हो सकती है, इसलिए गन्ना सड़न दवा का प्रयोग संतुलित मात्रा में करें।

गन्ने की फसल में फुटाव-

गन्ने की फसल में फुटाव ना आना एक सामान्य समस्या है। फुटाव का कम होना मुख्य रूप से बीज की बुवाई के समय के तापमान पर निर्भर करता है। यह देखा गया है कि अगर बुवाई के बाद ज्यादा गर्मी या ज्यादा ठण्ड हो तो गन्ने का फुटाव ठीक से नही हो पाता।

इसके अलावा मिटटी में उपलब्ध पोषक तत्वों की कमी भी एक प्रमुख कारण है। पेडी लगाने के लगभग 40 के बाद कल्ले बनने शुरू हो जाते है और यह लगभग 120 दिनों तक चलता है।

फसल में फुटाव ज्यादा ना होने के कारण पौधों का घनत्व कम हो जाता है और इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। कम फुटाव की होने पर गन्ने में फुटाव की दवा का प्रयोग भी कर सकते है।

गन्ने में कम फुटाव‌ का कारण- 

  • कई बार देखा गया है कि गन्ने की फसल को जमीन की सतह से बहुत ऊपर से काटने के कारण फसल बीमारियों और कीटों से प्रभावित हो जाती है और इसका असर अंकुरण पर भी पड़ता है।
  • मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों की कमी या कम मात्रा में उर्वरक का उपयोग करने के कारण।
  • खेतों में समय पर निराई-गुड़ाई का न होना। जिसके कारण खेतों में खरपतवारों की बहुतायत हो जाती है और इससे गन्ने के अंकुरण पर प्रभाव पड़ता है। बेहतर परिणाम के लिए गन्ना सड़न की दवा का भी प्रयोग किया जा सकता है।
  • पहली फसल के बाद खेत की हल्की जुताई का अभाव या सिंचाई का अभाव।
  • गन्ना धान की बुआई बिना उपचारित किये करें।
  • फसल में डीएपी का सही ढंग से प्रयोग न करना। कई किसान भाइयों में देखा गया है कि वे बिना जुताई किए ही फसल में डीएपी फैला देते हैं, जो बिल्कुल गलत है क्योंकि वह खाद पत्तों पर पड़ी रहती है। प्लांट इसका उपयोग नहीं कर सकता. इसलिए जुताई के बाद ही डीएपी देना चाहिए.

खेत में दिवाक का लगना –

फ़सल में दीमक का प्रकोप होने से फ़सल को काफ़ी नुक्सान होता है। दीमक का आक्रमण होने से उपचारों की साड़ी पत्तियाँ एक साथ सुख जाती हैं। इनका आक्रमण खेत में सबसे अधिक होता है जब खेत में पानी नहीं होता है तो डिमक भूमि की सतह के ऊपरी आकार से फसल को अधिक नुकसान होता है और जब भी खेत में पानी होता है तो डिमक भूमि की सतह के नीचे चला जाता है और नुकसान कम होता है ।।

पौधों में दीमक का पता कैसे लगाएं

पहली विधि-

पौधे की सभी पत्तियाँ एक साथ सूख जाती हैं। दीमक का पता लगाने के लिए पौधे के पास के उपले जो सूख गए हों, उनमें से कुछ मिट्टी निकालकर उसमें दबा दें। दो दिन बाद दीमक मिट्टी से निकलकर गोबर के उपलों में आ जाते हैं।

दूसरी विधि-

जिस पौधे की पत्तियाँ सूख गई हों, उसके आसपास की मिट्टी हटा कर उखाड़ दी जाए तो जड़ों पर दीमक का प्रकोप देखा जा सकता है। ध्यान रखें कि पौधे को उखाड़ना है क्योंकि दीमक पौधे की जड़ों को प्रभावित करती है।

गन्ने में दीमक की दवा-

  • खेत में दीमक नियंत्रण के लिए क्लोरपाइरीफॉस 20 ई.सी. प्रति लीटर या क्लोरपायरीफॉस 50 ई.सी. प्रति एकड़ 400 मि.ली. का प्रयोग करना चाहिए।
  • यदि दीमक का प्रकोप अधिक हो तो क्लोरपाइरीफॉस 20 ईसी का प्रयोग करें। एक लीटर प्रति एकड़ या क्लोरपायरीफॉस 50 ई.सी. इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 100 मिली को 400 मिली प्रति एकड़ में मिलाकर प्रयोग करना चाहिए।
  • इसके अलावा आप चाहें तो बिफेन्थिरिन 10EC. प्रति एकड़ 400 मिलीलीटर दवा का भी प्रयोग किया जा सकता है।

औषधि के प्रयोग की विधि-

ऊपर बताई गई किसी भी दवा का पत्तियों पर छिड़काव नहीं करना चाहिए। सबसे अच्छा और प्रभावी तरीका यह है कि दवा को मिलाकर सिंचाई नाली के ऊपर एक बोतल में भर लें, उसमें एक छेद कर दें और नाली के ऊपर लटका दें। यह पानी के साथ खेत में चला जाएगा और हर जगह फैल जाएगा.

या सिंचाई के बाद दवा का घोल बनाकर पूरे खेत में समान मात्रा में समान दूरी पर गिराना चाहिए। यह पानी में अच्छे से घुल जाता है. ध्यान रखें कि खेत का पानी कहीं से भी बाहर नहीं निकलना चाहिए, अन्यथा दवा का असर कम होता है। और जब आप इस विधि का प्रयोग करें तो खेत में पर्याप्त मात्रा में पानी भर देना चाहिए ताकि दवा चारों ओर अच्छे से घुल जाए.

  • गन्ना पर्ची गन्ना भुगतान गन्ना फसल से संबंधित किसी भी जानकारी को प्राप्त करने के लिए enquirycaneup.info पर जाएं

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top